Ramzan ke Roze ka Kaffara Kaise Ada Kare | रोज़े छोड़ने पर जुर्माना

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों, रमजान के रोज़े तोड़ना गुनाह होता है इसे जितना जल्दी हो सके Ramzan ke Roze ka Kaffara अदा कर देना चाहिए.

Roza kin Cheezon se Toot Jata Hai ये मालूम होते हुए भी अगर रमजान के हालत में गलती कर देते है तो आप पर रोज़े का क़ज़ा और उसके साथ रोज़े का कफ्फारा भी लाजिम हो जाता है.

इसीलिए आज की पोस्ट में roze na rakhne ka kaffara क्या है और इसे कैसे और किस तरीके से करे चलिए जानते है.

Kaffara Aur Qaza में अंतर क्या है?

रमजान के रोज़े का कफ्फारा क्या है जानने से पहले आपको कफ्फारा और क़ज़ा में अंतर क्या समझना होगा तभी आप समझ सकते है की आपकी रोज़े तोड़ने पर कफ्फारा लाजिम है या क़ज़ा.

Kaffara:– जो शख्स रमजान के महीने में रोज़ा को जानबूझ कर छोड़ देता है उसे Kaffara कहते है.

Qaza:- किसी शख्स को रोज़े की हालत में कोई ऐसी परेशानी हो गया जिसपर रोज़ा तोड़ने की जरुरत है तो उसे क़ज़ा कहते है.

आपको समझना होगा की कफ्फारा मतलब जानबूझ रोज़ा तोड़ना और क़ज़ा मतलब परेशानी के कारण रोज़ा तोड़ना.

क़ज़ा रोज़े का मतलब बाद में एक रोज़े के बदले सिर्फ एक रोज़ा रखना होता है

Roze ka Kaffara Kaise Ada Kare

कोई शख़्स जिस पर रोज़ा रखना फ़र्ज़ हो रमज़ान का रोज़ा रखने के बाद जानबूझ कर कोई ऐसा काम करे जिससे रोज़ा टूट जाता है तो उस पर क़ज़ा के साथ कफ़्फ़ारा भी लाज़िम होता है।

आप सभी जानते हैं कि माहे रमज़ान की फ़ज़ीलत और बरकत तमाम महीनों से ज्यादा है और इस महीने में अल्लाह ने रोज़े फ़र्ज़ किये हैं, और उसका बदला ख़ुद देने का ऐलान फ़रमाया है अगर कोई इस मुबारक महीने में रोज़ा जानबूझ कर तोड़ता है तो उसको कफ्फारा अदा करना पड़ता है यानि जुर्माना देना पड़ता है, वो कफ्फारा या जुर्माना क्या है चलिए देखते हैं

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कफ्फारा कब वाजिब होता है ?

1. जब रमज़ान का रोज़ा तोड़ा हो यानि रमज़ान के अलावा किसी महीने में रोज़ा रखा हो तो कफ्फारा वाजिब नहीं

2. बगैर किसी शरई वजह के रमज़ान का रोज़ा तोड़ हो शरई वजह यानि बीमार हो गया, भूल गया, या सफ़र की वजह से तोड़ा है तो सिर्फ क़ज़ा वाजिब होगी

3. हमबिस्तरी की हो यानि बीवी के साथ हमबिस्तर हो गया हो

4. जिमा (संभोग) करने से, चाहे मनी निकली हो या नहीं।

5. औरत को छूने, बोसा लेने, साथ में लिटाने या शर्मगाहों (Private parts) को मिलाने की वजह से इन्ज़ाल होने ‌यानि मनी निकलने पर।

6. रोज़े की हालत में पानी पीने से Roze ka Kaffara वाजिब हो जाता है।

7. मज़े या ताक़त के लिये कुछ खाने-पीने से।

8. जिस जगह रोज़ा तोड़ने से कफ़्फ़ारा लाज़िम आता है उसमें शर्त यह है कि रात ही से रमज़ान के रोज़े की नीयत की हो अगर दिन में नीयत की और तोड़ दिया तो कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं जैसे कोई मुसाफ़िर सुबह सादिक़ (फ़ज्र) के बाद ज़हवा-ए-कुबरा (ज़वाल) से पहले अपने शहर को वापस आया और रोज़े की नीयत कर ली फिर तोड़ दिया तो कफ़्फ़ारा नहीं।

9. कफ़्फ़ारा लाज़िम होने के लिए भर पेट खाना ज़रूरी नहीं थोड़ा सा खाने से भी वाजिब हो जायेगा।

10. किसी शख़्स ने तेल लगाया, ग़ीबत की या कोई ऐसा काम किया कि जिससे रोज़ा नहीं टूटता मगर इसने यह गुमान कर लिया कि रोज़ा टूट गया या किसी आलिम ने भी रोज़ा टूटने का फ़तवा दे दिया और उसके बाद अब उसने कुछ खा-पी लिया जब भी कफ़्फ़ारा लाज़िम हो गया।

11. थूक कर चाट गया या दूसरे का थूक निगला तो कफ़्फ़ारा नहीं मगर महबूब का लुआब (थूक) लज़्ज़त के लिये या किसी दीनी हस्ती जैसे पीर या आलिम का लुआब तबर्रुक के लिए निगला तो कफ़्फ़ारा लाज़िम है।

12. जिन सूरतों में रोज़ा तोड़ने पर कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं उनमें यह शर्त है कि एक ही बार ऐसा हुआ हो और गुनाह का इरादा न हो वरना उसमें भी कफ़्फ़ारा है।

13. कच्चा गोश्त चाहे मुर्दार का हो खाने से कफ़्फ़ारा लाज़िम हो जाता है।

14. मिट्टी खाने की आदत की वजह से मिट्टी खाई तो कफ़्फ़ारा वाजिब है।

15. पेड़ के पत्ते या सब्ज़ियाँ जो खाई जाती हैं उनके खाने से कफ़्फ़ारा वाजिब है।

16. सहरी का वक़्त ख़त्म होने पर या भूलकर खाते में याद आने पर पर मुँह का निवाला निगल लिया तो दोनों सूरतों में कफ़्फ़ारा वाजिब है। लेकिन मुँह से निकाल कर फिर खाया हो तो सिर्फ़ क़ज़ा वाजिब होगी कफ़्फ़ारा नहीं।

रमजान के Roze ka Kaffara क्या है ?

जुर्माने के तौर पर आपको दिए गए इन 3 ऑप्शन में से एक को अंजाम देना पड़ेगा  

1. अगर हो सके तो एक बांदी या ग़ुलाम आज़ाद करें।

(नोटः- इस्लाम ही वह मज़हब है जिसने सबसे पहले ग़ुलाम प्रथा को ख़त्म करने की शुरूआत की। इस मक़सद को हासिल करने के लिये शरीयत के क़ानून बनाकर और दुनिया व आख़िरत के इनामात बताकर ग़ुलामी की ज़ंज़ीरों में जकड़े हुए लोगों को आज़ाद कराने के लिये लोगों को तरग़ीब दी यानि motivate किया। यहाँ पर क़सदन रोज़ा तोड़ने के जुर्माने के तौर पर ग़ुलाम या बांदी को आज़ाद करने का हुक्म फ़रमाने मे भी यही हिकमत है।)

2. या तो 2 माह मुसलसल रोजे रखे

लगातार साठ रोज़े रखें, एक रोज़ा भी छूट गया तो दोबारा से साठ रोज़े रखने होंगे। पहले के रोज़े गिनती में नहीं आयेंगे चाहे बीमारी या किसी मजबूरी की वजह से ही छूटा हो। औरत को हैज़ की वजह से बीच में रोज़े छूट जायें तो पाक होने पर बाक़ी रोज़े रखकर साठ पूरे करने से कफ़्फ़ारा अदा हो जायेगा।

3. या साठ (60) मिसकीनों को दो वक़्त खाना खिलाये

अगर दो रोज़े तोड़े तो दोनों के लिए दो कफ़्फ़ारे दे (जबकि दोनों दो रमज़ान के हों), अगर दोनों रोज़े एक ही रमज़ान के हों और पहले का कफ़्फ़ारा अदा न किया हो तो एक ही कफ़्फ़ारा  दोनों के लिए काफ़ी है।

कफ्फारे के रोजों में अगर माहवारी जाये

किसी औरत पर (रोज़े तोड़ने की वजह से) कफ्फारा वाजिब हो जाए और इसी वजह से वह मुसलसल 2 माह के रोजे रख रही है, लेकिन बीच में माहवारी के दिन आ जाएं तो उन दिनों में रोजा ना रखे बल्कि माहवारी से पाक होकर सिर्फ बाक़ी रोजे पाक होने के बाद फौरन रखने शुरू कर दें सिरे से 60 रोज़े रखने की ज़रुरत नहीं

और अगर दरमियान में निफ़ास ( यानि बच्चे की पैदाइश ) का खून आ जाए तो भी रोज़े न रखे बल्कि पाक होने के बाद बाक़ी रोज़े पूरे कर ले |

कफ्फारे के रोजे में बीमारी

अगर एक शख्स कफ्फारे के रोजे रख रहा था कि दरमियान में बीमार हो गया और कुछ रोजे छूट गए तो तंदुरुस्त होने के बाद फिर से दो महीने के रोजे रखे |

खाना खिलाने में तसलसुल (Continuity) जरूरी नहीं

अगर कोई कफ्फारे की वजह से फक़ीरों को खाना खिला रहा है तो दो वक्त मुसलसल खिलाना जरूरी नहीं है बल्कि दिन रात में खिलाया, या दोनों दिन रात का खाना खिलाए, या दिन ही दिन में खिलाये

अगर बीच में नागा हो जाए तो भी कुछ नहीं है बाद में पूरा कर ले हाँ ये जरूरी है कि पहले वक़्त जिन फक़ीरों को खिलाया हो दूसरे वक्त भी उन्हीं को खिलाएं |

एक ही ग़रीब को साठ दिन तक खाना खिलाना

अगर किसी ने 60 दिन किसी एक गरीब को दोनों वक्त बिठाकर खिलाया तो कफ्फारा अदा हो जाएगा या कफ्फारे में अनाज और उसकी क़ीमत 60 दिन तक का देते रहे तब भी कफ्फारा अदा हो जाएगा

अगर खाना न खिलाये बल्कि 60 फक़ीरों को कच्चा अनाज देदे वो भी जाएज़ है

लेकिन हर मिस्कीन को इतना दे जितना एक आदमी की तरफ से सदक़ा तुल फ़ित्र दिया जाता है या उसकी कीमत दे दे वो भी जाएज़ है

आज आपने क्या सिखा

रोज़ा तोड़ना सख्त गुनाह इसके लिए Roze ka Kaffara जरुरी होता है Roze ka Kaffara कब लगता है इनसभी सवालो का जवाब आप इस आर्टिकल सीख लिया.

मुझे उम्मीद है Roze ka Kaffara Kaise Ada Kare आपको मालूम हो गया होगा तो इस जानकारी को अपने पास भी रखे और अपने दोस्तों के पास भी शेयर करे इससे आपको सवाब मिलेगा.

दुआ में याद रखिए खुदा हाफिज!!

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