शब-ए-कद्र क्यों मनाना चाहिए इसका जवाब स्टोरी में दिया गया है जिसको पढ़कर Shab e Qadr क्यों मनाते है जान जाओगे

Shab e Qadr kyu Manate hai ये सवाल दिलों मे उठना तो लाजमी है क्यूंकि हमें बचपन से ये बताया गया है कि Shab e qadr की रात जागकर जो अल्लाह की इबादत करता है अल्लाह उससे खुश होकर उसकी मगफिरत कर देता है

शबे कद्र वो रात है जिसमें क़ुरान प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुई थी और इस रात अल्लाह अपने बन्दों की सुनता है

Shab e qadr को मनाने के एक नहीं ब्लकि हज़ारों कारण हैं जिनमे से कुछ हम आपको बताने जा रहे हैं; आपसे उम्मीद है कि आप इसे पूरा पढ़ेंगे और अमल करने की पूरी कोशिश करेंगे. 

इस रात कुरान की पहली आयत प्यारे नबी (ﷺ) पर नाज़िल हुई थी जिब्राइल अलैहिस्सलाम के द्वारा अल्लाह के हुक्म से 

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इस रात को अल्लाह अपने बन्दों की माफ़ी कबूल करता और उनकी मगफिरत कर देता है साथ ही साथ उन्हें हिदायत दी भी देता है 

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रमजान का तीसरा अशरा आग से बचने का होता है इसलिए हम इस पाक रात को अल्लाह से माफी मांगते हैं औए तीसरे अशरे की दुआ पढ़ते रहते हैं.

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इस रात की इबादत का मुकाबला किसी और रात से नहीं किया जा सकता, इस रात की इबादत सबसे अलग है जो हमें अल्लाह के काफी नजदीक ले जाती है जो किसी और दिन या रात मे नहीं हो सकता.

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इसी रात को कुरान को जन्नत से दुनिया में भेजा गया था, जिसकी वजह से इस रात की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाती है.

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रमज़ान के तीसरे अशरे मे इतीकाफ मे बैठा जाता है क्यूंकि रमजान का तीसरा अशरा बहुत ही पाक है; इसलिए इतीकाफ मे जरूर बैठे अगर आप अल्लाह से और भी ज्यादा नजदीक होना चाहते हैं.

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