40 Rabbana Dua With Hindi Translation | रब्बना दुआ हिंदी में

क्या आप 40 Rabbana Dua दुआ पढ़ते है और अगर पढ़ते है तो इसका मतलब जानते है और मतलब जानते है तो क्या मतलब को सामने रख कर पढ़ते है।

दुआ को हज़रत मुहम्मद सल्लाह अलैहे वसल्लम ने इबादत का मग्ज बताया है.

रब्बना दुआ क्या है?

रब्बना दुआ को Quranic Dua भी कहा जाता है ये कुरान शरीफ में 40 बार रब्बना से शुरू होता है, इसीलिए इसे Rabbana Duas कहते है.

Rabbana Dua 1

رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ

Rabbana taqabbal minnaa innaka Antas Samee’ul Aleem

ऐ हमारे रब हमारी (ये खिदमत) क़ुबूल कर बेशक़ तू ही (दुआ) का सुनने वाला है (और उसका) जानने वाला है। [2:127]

Rabbana Dua 2

رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ

Rabbana waj’alnaa muslimaini laka wa min zurriyyatinaaa ummatam muslimatal laka wa arinaa manaasikanaa wa tub ‘alainaa innaka antat Tawwaabur Raheem

“ऐ हमारे रब्ब हमें अपना फरमाबरदार बना दे और हमारी औलाद में से भी एक जम’आत को अपना फरमाबरदार बना और हमें हमारे हज के तारीके बता दे और हमारी तौबाह क़ुबूल फरमा बेशक़ तू बड़ा तौबाह क़ुबूल करने वाला निहायत रहम वाला है।” [2:128]

Rabbana Dua 3

رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِى ٱلدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

Rabbana atina fid dunyaa hasanatanw wa fil aakhirati hasanatanw wa qinaa azaaban Naar

“ऐ हमारे रब्ब हमें दुनिया में नेकी और आख़िरत में भी नेकी दे और हमें दोज़ख ले अज़ाब से बचा।” [2:201]

Rabbana Dua 4

رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراً وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى القَوْمِ الكَافِرِينَ

Rabbana afrigh ‘alainaa sabranw wa sabbit aqdaamanaa wansurnaa ‘alal qawmil kaafireen

“ऐ हमारे रब! हमपर धैर्य उडेल दे और हमारे क़दम जमा दे और इनकार करनेवाले लोगों पर हमें विजय प्रदान कर।” [2:250]

Rabbana Dua 5

رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَآ إِن نَّسِينَآ أَوْ أَخْطَأْنَا

Rabbana laa tu’aakhiznaaa in naseenaaa aw akhtaanaa

“ऐ हमारे रब अगर हम भूल जाये या ग़लती करें तो हमें न पकड़।” [2:286]

Rabbana Dua 6

رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَآ إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِنَا

Rabbana wa laa tahmil-‘alainaaa isran kamaa hamaltahoo ‘alal-lazeena min qablinaa

“ऐ हमारे रब और हम पर भारी बोझ न रख जैसा तूने हम से पहले लोगो पर रखा था।” [2:286]

Rabbana Dua 7

رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦ ۖ وَٱعْفُ عَنَّا وَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَآ ۚ أَنتَ مَوْلَىٰنَا فَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَٰفِرِينَ

Rabbana wa laa tuhammilnaa maa laa taaqata lanaa bih; wa’fu ‘annaa waghfir lanaa warhamnaa; Anta mawlaanaa fansurnaa ‘alal qawmil kaafireen

“ऐ हमारे रब और हमसे वह बोझ न उठवा जिसकी हमें ताक़त नहीं और हमें मु’आफ़ कर दे और हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर तू ही हमारा कारसाज़ है काफिरों के मुक़ाबले में तू हमारी मदद कर।” [2:286]

Rabbana Dua 8

رَبَّنَا لاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ ھَدَیْتَنَا وَھَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنتَ الْوَھَّابُ

Rabbana laa tuzigh quloobanaa ba’da iz hadaitanaa wa hab lanaa mil ladunka rahmah; innaka antal Wahhaab

“ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है।” [3:8]

Rabbana Dua 9

رَبَّنَآ إِنَّكَ جَامِعُ ٱلنَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ

Rabbanaaa innaka jaami ‘un-naasil Yawmil laa raibafeeh; innal laaha laa yukhliful mee’aad

“ऐ हमारे रब! तू एक दिन सब लोगों को इकट्ठा करने वाला है जिसमें कोई शक़ नहीं बेशक़ अल्लाह अपने वादे के खिलाफ नहीं करता।” [3:9]

Rabbana Dua 10

رَبَّنَآ إِنَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

Rabbanaaa innanaaa aamannaa faghfir lanaa zunoobanaa wa qinaa ‘azaaban Naar

“ऐ हमारे रब हम ईमान लाए है सो हमें हमारे गुनाह बख़्श दे और हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले।” [3:16]

Rabbana Dua 11

رَبَّنَآ ءَامَنَّا بِمَآ أَنزَلْتَ وَٱتَّبَعْنَا ٱلرَّسُولَ فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّٰھِدِینَ

Rabbanaaa aamannaa bimaaa anzalta wattaba’nar Rasoola faktubnaa ma’ash shaahideen

“ऐ हमारे रब हम इस चीज़ पर ईमान लाए जो तूने नाज़िल की और हम रसूल के ता’बेदार हुए सो तू हमें गवाही देने वालो में लिख ले।” [3:53]

Rabbana Dua 12

رَبَّنَا ٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِىٓ أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَٰفِرِينَ

Rabbanagh fir lanaa zunoobanaa wa israafanaa feee amirnaa wa sabbit aqdaamanaa wansurnaa ‘alal qawmil kaafireen

“ऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज्यादतियॉ माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफ़िरों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे|” [3:147]

Rabbana Dua 13

رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَٰطِلًا سُبْحَٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

Rabbanaa maa khalaqta haaza baatilan Subhaanaka faqinaa ‘azaaban Naar

“ए हमारे रब ! तू ने इन को यूँ ही पैदा नहीं किया, तेरी ज़ात पाक है, बस तू हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा ले” [3:191]

Rabbana Dua 14

رَبَّنَآ إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ ٱلنَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُۥ ۖ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
Rabbanaaa innaka man tudkhilin Naara faqad akhzai tahoo wa maa lizzaalimeena min ansaar

“ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं” [3:192]

Rabbana Dua 15

رَّبَّنَآ إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِى لِلْإِيمَٰنِ أَنْ ءَامِنُوا۟ بِرَبِّكُمْ فَـَٔامَنَّا
Rabbanaaa innanaa sami’naa munaadiyai yunaadee lil eemaani an aaminoo bi Rabbikum fa aamannaa

“ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए” [3:193]

Rabbana Dua 16

رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَیِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ
Rabbanaa faghfir lanaa zunoobanaa wa kaffir ‘annaa saiyi aatina wa tawaffanaa ma’al abraar

“ए हमारे रब ! तू हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमारी बुराइयों को धो दे और नेक लोगों के साथ हमें मौत दे” [3:193]

Rabbana Dua 17

رَبَّنَا وَءَاتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ
Rabbanaa wa aatinaa maa wa’attanaa ‘alaa Rusulika wa laa tukhzinaa Yawmal Qiyaamah; innaka laa tukhliful mee’aad

“ए हमारे रब ! अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं” [3:194]

Rabbana Dua 18

رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّٰهِدِينَ
Rabbanaaa aamannaa faktubnaa ma’ash shaahideen

“ए हमारे रब ! हम तो ईमान ला चुके तो (रसूल की) तसदीक़ करने वालों के साथ हमें भी लिख रख” [5:83]

Rabbana Dua 19

رَبَّنَآ أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةً مِّنَ ٱلسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةً مِّنكَ ۖ وَٱرْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ
Rabbanaaa anzil ‘alainaa maaa’idatam minas samaaa’i takoonu lanaa ‘eedal li awwalinaa wa aakhirinaa wa Aayatam minka warzuqnaa wa Anta khairur raaziqeen

“ए हमारे रब ! हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है” [5:114]

Rabbana Dua 20

رَبَّنَا ظَلَمْنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلْخَٰسِرِينَ
Rabbanaa zalamnaaa anfusanaa wa illam taghfir lanaa wa tarhamnaa lanakoonanna minal khaasireen

“ए हमारे रब ! हम ने अपने ऊपर बड़ा ज़ुल्म किया और अगर तू ने हमारी मगफिरत न की और हम पर रहम न फ़रमाया तो यक़ीनन हम बड़े घाटे में आ जाएंगे” [7:23]

Rabbana Dua 21

رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِینَ
Rabbanaa laa taj’alnaa ma’al qawmiz zaalimeen

“ए हमारे रब ! हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना” [7:47]

Rabbana Dua 22

رَبَّنَا افْتَحْ بَیْنَنَا وَبَیْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَیْرُ الْفَاتِحِینَ
Rabbanaf-tah bainana wa baina qawmina bil haqqi wa anta Khairul Fatiheen

“ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है” [7:89]

Rabbana Dua 23

رَبَّنَآ أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
Rabbanaaa afrigh ‘alainaa sabranw wa tawaffanaa muslimeen

“ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले” [7:126]

Rabbana Dua 24

رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِینَ ; وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِینَ
Rabbana la taj’alna fitnatal lil-qawmidh-Dhalimeen wa najjina bi-Rahmatika minal qawmil kafireen

“ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना और अपनी रहमत से हमें इन काफ़िर लोगों (के नीचे) से नजात दे” [10:85-86]

Rabbana Dua 25

رَبَّنَآ إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِى وَمَا نُعْلِنُ ۗ وَمَا يَخْفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِن شَىْءٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ
Rabbanaaa innaka ta’lamu maa nukhfee wa maa nu’lin; wa maa yakhfaa ‘alal laahi min shai’in fil ardi wa laa fis samaaa

“ए हमारे रब! जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और अल्लाह से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में” [14:38]

Rabbana Dua 26

رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِنْ ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَآءِ‏
Rabbij ‘alnee muqeemas Salaati wa min zurriyyatee Rabbanaa wa taqabbal du’aaa

“ए हमारे रब! जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और अल्लाह से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में” [14:38]

Rabbana Dua 27

رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِینَ یَوْمَ یَقُومُ الْحِسَابُ
Rabbanagh fir lee wa liwaalidaiya wa lilmu’mineena Yawma yaqoomul hisaab

“ए हमारे रब! जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे” [14:41]

Rabbana Dua 28

رَبَّنَآ ءَتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
Rabbanaaa aatinaa mil ladunka rahmatanw wa haiyi’ lanaa min amrinaa rashadaa

“ए हमारे रब! हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर” [18:10]

Rabbana Dua 29

رَبَّنَآ إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَآ أَوْ أَن يَطْغَى
Rabbanaaa innanaa nakhaafu ai yafruta ‘alainaaa aw ai yatghaa

“ए हमारे रब! हम डरते हैं कि कहीं वह हम पर ज्यादती (न) कर बैठे या ज्यादा सरकशी कर ले” [20:45]

Rabbana Dua 30

رَبَّنَآ ءَمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَیْرُ الرَّاحِمِینَ
Rabbanaaa aamannaa faghfir lanaa warhamnaa wa Anta khairur raahimeen

“ए हमारे रब! हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है” [23:109]

Rabbana Dua 31

رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا إِنَّهَا سَآءَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
Rabbanas-rif ‘anna ‘adhaba jahannama inna ‘adhabaha kana gharama innaha sa’at musta-qarranw wa muqama

“ए हमारे रब! हम से जहन्नुम का अज़ाब फेरे रहना क्योंकि उसका अज़ाब बहुत (सख्त और पाएदार होगा) बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना और बुरा मक़ाम है” [25:65-66]

Rabbana Dua 32

رَبَّنَا ھَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّیَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْیُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِینَ إِمَامًا
Rabbanaa hab lanaa min azwaajinaa wa zurriyaatinaa qurrata a’yuninw waj ‘alnaa lilmuttaqeena Imaamaa

“ए हमारे रब! हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना” [25:74]

Rabbana Dua 33

رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ
Rabbana la Ghafurun shakur

“बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है” [35:34]

Rabbana Dua 34

رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِینَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِیلَكَ وَقِھِمْ عَذَابَ الْجَحِیمِ
Rabbanaa wasi’ta kulla shai’ir rahmatanw wa ‘ilman faghfir lillazeena taaboo wattaba’oo sabeelaka wa qihim ‘azaabal Jaheem

“परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले” [40:7]

Rabbana Dua 35

رَبَّنَا وَأَدْخِلْھُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّھُم وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِھِمْ وَأَزْوَاجِھِمْ وَذُرِّیَّاتِھِمْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِیزُ الْحَكِیمُ وَقِھِمُ السَّیِّئَاتِ وَمَن تَقِ السَّیِّئَاتِ یَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَھُ وَذَلِكَ ھُوَ الْفَوْزُ الْعَظِیمُ
Rabbana wa adhkhilhum Jannati ‘adninil-lati wa’attahum wa man salaha min aba’ihim wa azwajihim wa dhuriyyatihim innaka antal ‘Azizul-Hakim, waqihimus sayyi’at wa man taqis-sayyi’ati yawma’idhin faqad rahimatahu wa dhalika huwal fawzul-‘Adheem

“ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है।”

“और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है” [40:8-9]

Rabbana Dua 36

رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ اٰمَنُوا
Rabbanagh fir lanaa wa li ikhwaani nal lazeena sabqoonaa bil eemaani wa laa taj’al fee quloobinaa ghillalil lazeena aamanoo

“ए हमारे रब ! हमें भी बख्श दीजिये और हमारे भाइयों को भी, जो हम से पहले ईमान लाये, और हमारे दिलों में मुसलमानों के बारे में कोई कीना न रहने दीजिये यक़ीनन आप ही शफीक और महेरबान हैं” [59:10]

Rabbana Dua 37

رَبَّنَآ إِنَّكَ رَؤُوفٌ رَّحِیمٌ
Rabbannaaa innaka Ra’oofur Raheem

“ए हमारे रब ! बेशक तू बड़ा शफीक़ निहायत रहम वाला है” [59:10]

Rabbana Dua 38

رَّبَّنَا عَلَیْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَیْكَ أَنَبْنَا وَإِلَیْكَ الْمَصِیرُ
Rabbanaa ‘alaika tawakkalnaa wa ilaika anabnaa wa ilaikal maseer

“ए हमारे रब ! हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं” [60:4]

Rabbana Dua 39

رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِینَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَآ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِیزُ الْحَكِیمُ
Rabbana laa taj’alnaa fitnatal lillazeena kafaroo waghfir lanaa rabbanaaa innaka antal azeezul hakeem

“ए हमारे रब ! तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है” [60:5]

Rabbana Dua 40

رَبَّنَآ أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَآ ۖ إِنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِیرٌ
Rabbanaaa atmim lanaa nooranaa waghfir lana innaka ‘alaa kulli shai’in qadeer

“ए हमारे रब ! हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है” [66:8]

40 Rabbana Duas With URDU Translation PDF

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रब्बना दुआ को कब पढ़ा जाए

रब्बना दुआ पढने के लिए कोई भी हदीस में समय नहीं बताया गया है, इससे ये साबित होता है की आप जब जाए ये दुआ को पढ़ सकते है. लेकिन कोशिश करे के हर नमाज़ के बाद इस दुआ को पढ़े.

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