रमजान क्या है और मुस्लिम के लिए यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इस्लामिक कैलेंडर में रमजान सबसे पवित्र महीना है। इस महीने के दौरान, मुसलमान सुबह से सूर्यास्त तक खाने-पीने से परहेज करते हैं। जब सूरज ढल जाता है, तो मुसलमानों के लिए प्रार्थना के लिए समय निकालने से पहले अपनी भूख को संतुष्ट करने के लिए किसी मिठाई, जैसे खजूर के साथ उपवास तोड़ना आम बात है। बाद में, दोस्त और परिवार एक बड़े भोजन, इफ्तार के लिए एक साथ इकट्ठा होंगे, जिसमें पारंपरिक खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जो किसी के परिवार और संस्कृति के लिए अद्वितीय होते हैं। हमारे जीवन के कई अन्य पहलुओं की तरह, हालांकि, COVID ने इस महत्वपूर्ण इस्लामी अवसर को प्रभावित किया है। प्रारंभ में, परिवारों को बंद करने और कर्फ्यू से रोक दिया गया था जिससे प्रभावित हुआ कि रमजान कैसे मनाया जाता है, जबकि 2021 में सवाल उठे हैं कि क्या महीने के दौरान टीकाकरण की अनुमति है।

उपवास इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है (अन्य विश्वास, प्रार्थना, मक्का की तीर्थयात्रा और दान की घोषणा हैं), और इसलिए, यह लगभग हर स्वस्थ वयस्क के लिए अनिवार्य है। बीमार बच्चों और वयस्कों को दायित्व से छूट दी गई है, जैसे यात्रियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को। हालांकि, कई बच्चे और छूट प्राप्त वयस्क अपने समुदायों के अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए वैसे भी उपवास करना चुनते हैं।

इस लेख में आपको रमजान के विषय पर पूरी जानकारी दी जा रही है! अतः यदि आप भी रमजान के विषय पर जानना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही लेख पर आये हैं. वैसे हमने पूरी कोशिश करी है आप तक सही जानकारी पहुंचाई जाये. तो आइये बिना देरी किये आज के इस लेख को शुरू करते हैं, और सर्वप्रथम जानते हैं की रमजान क्या है और रमजान क्यूँ मनाई जाती है.

रमजान क्या है – What is Ramadan in Hindi

रमज़ान या रमदान (उर्दू – अरबी – फ़ारसी : رمضان) इस्लामी कैलेण्डर का नवां महीना होता है. मुस्लिम समुदाय इस महीने को परम पवित्र मानते हैं . रमजान शब्द अरब से निकला है. अर्थात यह एक अरबिक शब्द है जिसका अर्थ है कि “चिलचिलाती गर्मी तथा सूखापन”.

जैसे की मैंने पहले ही बताया है, इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौंवे महीने रमजान का महीना होता है, जिसमें प्रति वर्ष मुस्लिम समुदाय द्वारा रोजे रखे जाते हैं! इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना “अल्लाह से इबादत” का महीना होता है!

मान्यता है कि रमजान के अवसर पर दिल से अल्लाह कि बंदगी करने वाले हर शख्स की ख्वाहिशें पूरी होती है, रमजान के मौके पर मुस्लिम समुदायों द्वारा पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं! रोजे रखने का अर्थ वास्तव में ” सच्चे दिल से ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना होता है.

हालांकि वे धार्मिक लोग जिनकी इस दौरान तबीयत खराब होती है, उम्र अधिक होती है, गर्भावस्था के होने तथा अन्य परेशानियां की वजह से रोजे रखने में जो असमर्थ हैं, उन्हें रोजे न रखने की अनुमति होती है.

रमजान कैसे मनाया जाता है?

रमजान के महीने में रोजे के दौरान मुस्लिम समुदाय द्वारा दिन भर में भोजन या जलपान ग्रहण नहीं किया जाता. साथ ही इस दैरान बुरी आदतों जैसे -सिगरेट, तम्बाकू का सेवन करना सख्त मना होता है!

रोजे रखने वाले रोजेदारों द्वारा सूर्य उगने से पूर्व थोड़ा भोजन खाया जाता है इस समय को मुस्लिम समुदाय द्वारा सुहूर (सेहरी) भी कहा जाता है. जबकि दिन भर रोजा रखने के बाद शाम को रोजेदारों द्वारा जिस भोजन को ग्रहण किया जाता है उसे इफ्तार नाम दिया गया है.

रमजान के महीने में रोजेदार रोजे को खजूर खाकर तोड़ते हैं, क्योंकि इस्लामिक मान्यताओं से पता चलता है कि अल्लाह के दूत को अपना रोजा खजूर खाकर खोलने को कहा गया था. और तब से ही रोजेदार इफ्तार एवं सेहरी में खजूर खाते हैं.

इसके अलावा खजूर खाना सेहत के लिए भी लाभकारी होता है. विज्ञान के अनुसार खजूर पेट की दिक्कतों, लीवर एवं अन्य कमजोरियों को ठीक करने में मदद करता है, इसलिए रोजेदारों द्वारा खजूर का सेवन किया जाता है.

रमजान का यह महीना ईद-उल-फितर से समाप्त होता है, जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है. यह दिन सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए हर्षोल्लास का होता है, वे इस दिन नए कपड़े पहन कर सज-धज के मस्जिद में या ईदगाह जाते हैं और वहां नमाज पढ़कर खुदा को शुक्रिया करते हैं, तथा गले लग कर एक दूसरे को बधाइयां देते हैं.

रमजान का महत्व

मुस्लिम समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के लिए रमजान का महीना सबसे पवित्र महीना होता है.

रमजान के इस पवित्र महीने में पूरे महीने मुस्लिमों द्वारा रोजे रखे जाते हैं, मान्यता है कि रोजे रखने वाले व्यक्ति की ईश्वर द्वारा उसके सभी गुनाहों की माफी दी जाती है.

अतः प्रत्येक मुसलमान के लिए रमजान का महीना साल का सबसे विशेष माह होता है! मान्यता है कि रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुले रहते हैं, अतः अल्लाह के प्रति श्रद्धा रखने वाले सभी मुस्लिमो द्वारा रमजान में रोजे रखे जाते हैं. तथा रमजान के बाद मुस्लिमो द्वारा ईद के त्योहार को मनाया जाता है.

रमजान क्यों मनाया जाता है

इस्लाम धर्म की मान्यताओं के मुताबिक रमजान का महीना खुद पर नियंत्रण एवं संयम रखने का महीना होता है? अतः रमजान के महीने में मुस्लिम समुदाय द्वारा रोजे रखने का मुख्य कारण है “गरीबों के दुख दर्द को समझना“.

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार रमजान के महीने में रोजे रखकर दुनिया में रह रहे गरीबों के दुख दर्द को महसूस किया जाता है!

रोजे के दौरान संयम का तात्पर्य है कि आंख, नाक, कान, जुबान को नियंत्रण में रखा जाना! क्योंकि रोजे के दौरान बुरा न सुनना, बुरा न देखना, न बुरा बोलना और ना ही बुरा एहसास किया जाता है. इस तरह से रमजान के रोजे मुस्लिम समुदाय को उनकी धार्मिक श्रद्धा के साथ साथ बुरी आदतों को छोड़ने के साथ ही आत्म संयम रखना सिखाते हैं.

इसके साथ ही यह भी मान्यता है कि गर्मी में रोजेदारों के पाप धूप की अग्नि में जल जाते हैं! तथा मन पवित्र होता हो जाता है और सारे बुरे विचार रोजे के दौरान मन से दूर हो जाते हैं.

रोज़ा क्यों रखा जाता है

अल्लाह ने मुसलमानों पर रोज़े अनिवार्य किए हैं। जिस प्रकार उसने इससे पहले की कौमों पर अनिवार्य किया था । अल्लाह तआला कुरआन में फ्रमाता है-

“ऐ ईमान लाने वालो! तुम पर रोज़े अनिवार्य किए गए, जिस प्रकार तुम से पहले के लोगों पर किए गये थे, ताकि तुम डर रखने वाले बन जाओ”

(कुरआन, 2:183)

यदि इसकी शाब्दिक परिभाषा की जाए तो रोजें का अर्थ रमज़ान के पूरे महीनें पूरी तरह खाने, पीने, मैथुन, धूम्रपान और हर तरह की अभद्र गाली-गलौज वाला आक्रामक व्यवहार और सांसारिक उत्तेजनाओं और इच्छाओं से, भोर से लेकर सूर्यास्त तक बचना है।

रमजान का इतिहास?

इस्लाम धर्म में रमजान में रोजे रखने का प्रचलन काफी पुराना है इस्लामिक धर्म की मान्यताओं के अनुसार मोहम्मद साहब (इस्लामिक पैगम्बर) को वर्ष 610 ईसवी में जब इस्लाम की पवित्र किताब कुरान शरीफ का ज्ञान हुआ तो तब से ही रमजान महीने को इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र माह के रूप में मनाया जाने लगा.

इस्लाम धर्म के लिए इस महीने के पवित्र होने का एक मुख्य वजह भी है कुरान के मुताबिक पैगंबर साहब को अल्लाह ने अपने दूत के रूप में चुना था! अतः यह महीना मुस्लिम समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के लिए विशेष एवं पवित्र होता है जिसमें सभी को रोजे रखना अनिवार्य माना गया है.

रोज़ा रखने से होने वाले फ़ायदे:

  • यह एक महीने का आध्यात्मिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम है ताकि मुसलमान अपने पैदा करने वाले और जीविका देने वाले अल्लाह द्वारा एक मुसलमान पर डाले गए कर्त्तव्यों को पूरा करने के लिए ताजादम हो सकें।
  • यह इंसान को शुद्ध प्रेम के सिद्धान्तों की शिक्षा देता है क्योंकि जब वह रोज़ा रखता है तो वह इसे अपने अल्लाह से गहरे प्रेम के कारण रखता है जो व्यक्ति अल्लाह से प्रेम करता है वह जानता है कि वास्तव में प्रेम है क्या?
  • यह इंसान के अंदर गहरी और जागती हुई चेतना का विकास करता है क्योंकि रोज़ा रखने वाला व्यक्ति अपना रोज़ा तन्हाई में भी रखता है और सावजनिक  रूप से भी। विशेष रूप से रोजें में कोई सांसारिक ताकत ऐसी नहीं होती जो इंसानी व्यवहार की जाँच कर सके या रोज़ा रखने के लिए उसे विवश कर सके । वह अपने अल्लाह को खुश करने के लिए रोजा रखता है और तन्हाई और सार्वजनिक रूप से वफादार रहकर अपनी चेतना को सन्तुष्ट करता है।इन्सान के अन्दर गहरी चेतना विकसित करने का इससे अच्छा तरीका और कोई नहीं हो सकता।
  • रोज़ा आत्म-नियन्त्रण पैदा करता है और अपने स्वार्थ, लालच और आलस्य पर काबू पाने में हमारी सहायता करता है। रोज़ा इंसान को, भूख और प्यास की तकलीफों का अनुभव करने योग्य बनाता है। व्यक्ति यह महसूस करना आरम्भ कर देता है कि गरीबों और अभागे लोगों को इसी तरह भूख लगती होगी, वह लाखों गरीब लोग जो प्रतिदिन भूखे सोते हैं।
  • एक सामान्य इंसानी कमजोरी गुस्सा है- इसे भी रोज़े के माध्यम से नियन्त्रित किया जा सकता है।
  • यह व्यावहारिक सन्तुलन और इच्छा शक्ति विकसित करने की प्रभावशाली शिक्षा है। जो व्यक्ति अपने रोज़े अच्छे ढंग से रखता है, वह निश्चित रूप से ऐसा इंसान है जो अपनी भावुक इच्छाओं को अनुशासित कर सकता है और वह अपने आप को भौतिक लालच से ऊपर रख सकता है। ऐसा व्यक्ति व्यक्तित्व और चरित्र वाला व्यक्ति होता है जिसके अन्दर इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय की विशेषताएँ होती हैं ।
  • यह इंसान को एक पारदर्शी आत्मा उपलब्ध कराता है ताकि भौतिकता से ऊपर उठ सके और शुद्ध मन उपलब्ध कराता है जो चिन्तन कर सके और हल्का शरीर उपलब्ध कराता है जो गतिशील और सक्रिय हो। इसी तरह जब वह अपने पेट को आराम देता है और अपने पाचन-तन्त्र को सुकून देता है तो वास्तव में वह अपने शरीर को पेट अधिक भरने के कारण जो हानि पहुँचती है उससे बचाव को सुनिश्चित करता है और इसी तरह आत्मा को भी। चिकित्सकीय निर्देश, जैविक नियम और बौद्धिक अनुभव इस तथ्य को प्रमाणित करते हैं ।
  • यह इंसान के अन्दर एकता, भाईचारा और अल्लाह के सामने और कानून के सामने भी सामाजिक लगाव की वास्तविक भावना उभारता है। यह भावना इस वास्तविकता का प्राकृतिक परिणाम है। जब इंसान रोज़ा रखता है तो वह महसूस करता है कि वह एक ही दिन, एक ही ढंग से, एक ही समय में, एक ही उद्देश्य और एक ही मंजिल के लिए रोज़ा रखकर पूरे मुस्लिम समाज के साथ मिल गया है।

रमजान की सच्चाई?

इसके अलावा समाज में रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखने वाले लोग के लिए कुछ भ्रामक धारणाएं फैली हुई है, आइए उन सच्चाईयों को भी जान लेते हैं.

कहा जाता है कि रमजान के माह में सभी मुस्लिम लोगों के लिए रोजा रखना अनिवार्य है, परंतु असल में यदि कोई व्यक्ति बीमार है या कोई मुस्लिम महिला गर्भवती है, या अन्य किन्हीं परेशानी की वजह से रोजा नहीं रखना चाहते तो यह उनकी व्यक्तिगत इच्छा है कि रोजे रखे या नहीं क्योंकि कुरान में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा गया है.

समाज में कई लोगों को यह भी लगता है कि रोजे रखने के दौरान थूक नहीं निगलना चाहिए! परंतु सच्चाई यह नहीं है हालांकि ऐसा उन्हें इसलिए लगता है क्योंकि रोजा रखने के दौरान पानी पीने की भी मनाही होती है.

इसके अलावा ऐसी भ्रांतियां फैली हुई है कि जिस व्यक्ति ने रोजा रखा है उसके सामने भोजन नहीं करना चाहिए. जबकि ऐसा नहीं है, रोजा रखने वाले व्यक्ति के पास इतनी सहन शक्ति होती है कि यदि उसके सामने दूसरा व्यक्ति भोजन करता भी है, तो रोजेदार की भोजन करने की इच्छा नहीं होती.

इसके अलावा रोजे रखने वाले व्यक्ति द्वारा गलती से किसी चीज़ का सेवन कर लिया जाता है तो इससे रोजा नहीं टूटता! बल्कि जब ऐसा जानबूझकर किया जाता है तो तब रोजा टूटता है.

तो इस तरह की कई अन्य भ्रांतियां समाज में फैली भी हैं, उनमें से कुछ के बारे में उपरोक्त बिंदुओं में बताया गया है.

आज अपने क्या सीखा

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