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Quran Padhne ka Tarika (2021) | कुरान पढ़ने का सही तरीका

आज हम जानेंगे कि Quran Padhne ka Tarika क्या है और क़ुरान शरीफ का अदब कैसे करे हम इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे, और इसे समझने का प्रयास करेंगे

Hello दोस्तों मैं आपका NamazQuran में Welcome करता हूं आज हम क़ुरान शरीफ के तरीके और अदब के बारे में चर्चा करने वाले हैं, हम Quran Padhne ka Tarika? यह जानेंगे इसके साथ साथ हम इससे जुड़े और कई तथ्यों को भी जानेंगे जैसे –

  • कुरान शरीफ के अदब
  • कुरान शरीफ में कोरोना का इलाज
  • कुरान शरीफ का ज़िक्र करने की फ़ज़ीलत
  • कुरान शरीफ में नबियों के नाम
  • क़ुरआन की तालीम हासिल करने की फ़ज़ीलत
  • ख्वाब में क़ुरआन पढ़ना

नाजरीन रोज़ाना क़ुरआन शरीफ (quran sharif) की तिलावत क्या करो क्योंकी रोज़ाना घरो में कुरान (Quran) की तिलावत करने से उस घर में अल्लाह तआला की रहमत बरसती है और जिस घर में अल्लाह की रहमतों का बरसात हो जाए उस घर में कुछ भी गलत हो ही नहीं सकता है |

एक हदीस शरीफ में आया है की नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम ने फ़रमाया है की रोज़ाना अपने घरो में क़ुरआन (Quran Sharif) की तिलावत करो और अपने घर वालो से भी करवाओ वो इस लिए की यही वो क़ुरान है जो क़यामत के दिन पढ़ने वालों को शफ़ाअत करने के लिए आएगी

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Quran Padhne ka Tarika

कुरान शरीफ अच्छी आवाज़ से पढ़ना चाहिए- लेकिन गाने की तरह नहीं पढ़ना चाहिए क्युकी इस तरह पढ़ना नाजाइज है.

कुरान शरीफ देखकर पढ़ना बिना देखे पढ़ने से बेहतर है अच्छा ये है के वजू करके किबला रुख अच्छे कपड़े पहनकर तिलावत करे और तिलावत के शुरू में अउजो बिल्लाहे पढ़ना वाजिब है और सुरह के शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ना सुन्नत है. Quran Sharif Padhne के बिच में कोई दुनयावी काम करे तो फिर से बिस्मिल्लाह पढ़ ले और दिनी काम किया जैसे सलाम का जवाब दिया, या अज़ान का जवाब दिया या सुभानअल्लाह कहा या कलमा वगैरा पढ़ा तो अउजो बिल्लाहे पढ़ना जरुरी नहीं है.

Quran Sharif ke अदब (Adab)

  • तिन दिन के अंदर में कुरान शरीफ ख़तम करना बेहतर नहीं.
  • जब Quran Majeed ख़तम हो जाए तो kul huwal la hu ahad पढ़ना बेहतर है.
  • लेट कर कुरान मजीद पढ़ने में हर्ज़ नहीं जबके पाओ (Knee) सिमटे हो और मुंह खुला हो
  • गुसल खाना और नजासत (Toilet) की जगह में Quran ki Tilawat
    करना नाजाइज (Wrong) है.
  • जो सख्स Quran ki Tilawat गलत पढता हो तो सुनने वाले पर वाजिब है की उसे बता दे.
  • अगर कोई व्यक्ति Quran Sharif पढ़ रहा है, वह बादशाह इस्लाम या अलीमे दीन या पीर या उस्ताद या पिता की बात आने पर उसके ताजीम तक खड़ा हो सकता है।
  • Market या जहाँ लोग काम मे लगे हो वहा जोर से Quran Padhne ka Tarika (Quran Padhna) नाजाइज है अगर लोग ना सुनेगे तो गुनाह पढ़ने वाले पर होगा।
  • अक्सर अर्स व फातिहा के मौका पर सब लोग जोर से पढ़ते है ये हराम है अगर चंद आदमी पढ़ने वाले हो तो हुक्म है के आहिस्ता पढ़े.
  • Quran Sharif जोर से पढ़ना अफज़ल है जबकी किसी नमाजी या बीमार या सोने वाले को तकलीफ ना पहुंचे.
  • दीवारों और मेहराबो पर कुरान मजीद की आयत लिखना अच्छा नहीं.
  • कुरान शरीफ पढ़ कर भूला जाना गुनाह है
  • कुरान मजीद जिस संदूक में हो उसपर कपड़ा वगैरा नहीं रखा जाए.
  • पुराने कुरान शरीफ जो पढ़ने के काबिल नहीं रहा उसे जलाया नहीं जाए बलके दफ़न किया जाए.
  • कुरान शरीफ की तरफ पीठ ना की जाए ना पाओ फैलाया जाए ना पाओ उससे ऊँचा रखे और कुरान शरीफ निचे है और आप ऊपर बैठे है ये सब गुनाह है.
Quran Padhne ka Tarika

कुरान शरीफ में कोरोना का इलाज

क्या क़ुरान शरीफ में कोरोना वायरस (Corona Virus in Quran) का ज़िक्र किया गया है या कोरोना वायरस का इलाज क़ुरान मज़ीद में है अगर जानना चाहते है तो निचे इस वीडियो को जरूर देखे.

Quran Padhne ka Tarika

Quran Sharif ka zikr karne ki Fazilat

आप सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया : जो लोग अल्लाह के घर या किसी घर में जमा होकर अल्लाह की किताब की तिलावत करते और आपस मे उसका zikar करते हैं, तो उन पर सकीनत नाज़िल होती है, रहमत इलाही उन्हें ढाँप लेती है, फरिश्ते उन्हें घेर लेते हैं और अल्लाह तआला अपने पास मौजुद फरिश्तों में उनका तजकिरह करते हैं।

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Quran ki Taleem Hasil karne ki Fazilat

हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया है : जिस ने Quran Padhne ka Tarika Aur Talim Hasil की और उस पर अमल किया, उसके वालीदेन ( माँ – बाप ) को क़यामत के दिन नुर का ताज पहनाया जाएगा। जिस की रोशनी सुरज की रोशनी की मानन्द होगी, नेज़ उसके वालीदेन को ऐसा जोड़ा पहनाया जाएगा जिसके सामने पुरी दुनियाँ भी हीच होगी, वह दोनों कहेंगे : हमें यह किस सिले मे पहनाया गया है ? तुम दोनों के बच्चे के कुरान सीखने के सिले में।

Quran Sharif me Nabiyon ke Naam

जिस इंसान को अल्लाह ने मखलूक की हिदायत के लिए भेजा हो उसे नबी कहते है और उन नबियों में से जो अल्लाह की तरफ से कोई नयी आसमानी किताब और नयी शरीयत ले कर आयी उसे रसूल कहते है.

सब नबी मर्द थे न कोई जीन नबी हुआ, न कोई औरत नबी हुआ

सबसे पहले पैगम्बर हज़रते सय्यिदना आदम अलैहे सलाम है और सबसे आखिरी पैगम्बर हज़रते सय्यदना मोहम्मद मुस्तफा अलैहे सलाम है और बाकी तमाम नबी और रसूल इन दोनों के बिच आए है.

Quran Sharif me kitne Nabiyon ke Naam hai

क़ुरान मज़ीद में 26 Nabiyon ke Naam आया है

#NameNumber
1हज़रत आदम अलैहे सलाम25 बार
2हज़रत नूह अलैहे सलाम43 बार
3हज़रत इब्राहिम अलैहे सलाम69 बार
4हज़रत इस्माइल अलैहे सलाम12 बार
5हज़रत इशहाक अलैहे सलाम17 बार
6हज़रत याक़ूब अलैहे सलाम16 बार
7हज़रत यूसुफ अलैहे सलाम27 बार
8हज़रत दाऊद अलैहे सलाम16 बार
9हज़रत सुलेमान अलैहे सलाम17 बार
10हज़रत अयूब अलैहे सलाम4 बार
11हज़रत मूसा अलैहे सलाम136 बार
12हज़रत हारून अलैहे सलाम20 बार
13हज़रत जकारिया अलैहे सलाम7 बार
14हज़रत याह्या अलैहे सलाम5 बार
15हज़रत ईसा अलैहे सलाम25 बार
16हज़रत ऐलियास अलैहे सलाम3 बार
17हज़रत अयूब अलैहे सलाम2 बार
18हज़रत Dhul-Kifl अलैहे सलाम2 बार
19हज़रत यूनुस अलैहे सलाम4 बार
20हज़रत लूत अलैहे सलाम27 बार
21हज़रत इदरिस अलैहे सलाम2 बार
22हज़रत सालेह अलैहे सलाम9 बार
23हज़रत हूद अलैहे सलाम7 बार
24हज़रत शुऐब अलैहे सलाम11 बार
25हज़रत उजैर अलैहे सलाम1 बार
26हज़रत मुहम्मद अलैहे सलाम4 बार
Quran Padhne ka Tarika

Khwab mein Quran Padhne ka Tarika Bayan

अगर ख़्वाब में देखे की

  • आधा क़ुरान शरीफ पढ़ा है तो दलील है के उसकी आधी उम्र (AGE) गुजर चुकी है.
  • हाफिज क़ुरान हो गया है तो दलील है के अमानत को निकाह में रखेगा।
  • क़ुरान मजीद की आवाज सुनी तो दलील है के उसका काम राहे दीन में नेक है.

ख़्वाब में क़ुरान मजीद देखने के बारे ज्यादा जानना चाहते है तो इस वीडियो को देखे.

Quran Paak ki Hadees (बयान)

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया क़ुरान शरीफ पढ़ो इसलिए कि वो क़यामत के दिन अपने पढ़ने वाले की सिफ़ारिश बनकर आएगा और उसकी शिफ़ादत कुबूल होगी और इमामे बुख़ारी ने रिवायत की है प्यारे नबी सल्ललाहो अलैह व सल्लम ने फ़रमाया कि बेशक तुम में सबसे ज्यादा फ़जीलत वाला वो है, जिसने कुरान सीखा या सिखाया (बुख़ारी शरीफ़ जिल्द 2, सफ़ा 752)।

क़ुरान पाक ज़रूरत के मुताबिक 23 साल में थोड़ा-थोड़ा करके माहे मज़ान के शबे क़दर में नाज़िल हुआ।

क़ुरान शरीफ देखकर पढ़ना ज्यादा सवाब रखता है, बग़ैर देखकर पढ़ने से, क्योंकि क़ुरान का देखना उसका छूना, उसको पास रखना भी सवाब है।

क़ुरआन पाक में

  • 30 पारे हैं
  • 32,3760 हरुफ़ हैं
  • 114 सूरते हैं
  • 540 रुकु हैं
  • 14 सजदे हैं
  • 6666 आयते हैं
  • 5320 ज़बर हैं
  • 39582 ज़ेरा हैं
  • 8804 पेश हैं
  • 105684 नुक़ते हैं

Quran Sharif की किसी आयत को ऐब लगाना या उसकी तौहीन करना या उसके साथ मज़ाक या दिल्लगी करना या आयते क़ुरान को बेमौके महल पढ़ देना के लोग सुनकर हँसें ये क्रुफ है।

क़ुरान की कसम भी कसम है, अगर उसके ख़िलाफ होगा कफ्फ़ारा लाज़िम आएगा।

जब बुलंद आवाज़ से क़ुरान पाक पढ़ा जाए तो तमाम हाज़रीन पर सुनना फ़र्ज़ है, जबकि वो मजमा सुनने के लिए ही हो, वरना एक का सुनना काफी है।

Kya Quran Padhne ke liye wazoo zaroori hai

क्या क़ुरआन शरीफ पढ़ने के लिए वज़ू ज़रूरी है, क्या बगैर वज़ू क़ुरान शरीफ पढ़ सकते है यह जानने के लिए निचे ऑडियो (Audio) को सुन सकते है.

Quran Padhne ka Tarika

Kya Gair Muslim Ko Wazu Karwakr Usko Quran De Sakte Hai

क्या गैर मुस्लिम को वज़ू करवाकर उसको क़ुरान शरीफ पढ़ने के लिए दे सकते है अगर जानना चाहते है तो इस Audio को सुन सकते है.

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Quran paak main kis pathar ka zikr hai

Quran Paak me Jis Pathar ka zikr aaya hai us pathar naam Marjan hai.

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Quran Sharif Padh Kar Mayyat (Murde) ko Bakhshawa sakte hai.

Quran Majeed main lafz Al Quran kitni dafa aaya hai

Quran Sharif me lafz AL Quran 66 dafa (Times) aaya hai.

Quran me Sabse Jyada kis Nabi ka Naam hai

क़ुरान शरीफ में हज़रत मूसा (Mausa A.S) अलैहे सलाम नाम सबसे ज्यादा बार आया है.

Quran me lafz Allah kitni baar aaya hai

क़ुरान मज़ीद में लफ्ज़ अल्लाह (Lafz Allah) 2697 बार (Times) आया है

Quran me lafz Kitab kitni baar aaya hai

क़ुरान मज़ीद में लफ्ज़ Kitab 256 बार (Times) आया है

Quran me Muhammad Naam kitni baar Aaya hai

क़ुरान मजीद में हज़रत मुहम्मद अलैहे सलाम का ज़िक्र मुहम्मद के नाम से 4 बार आया है, और अहमद के नाम से 1 बार आया है.

Quran me namaz ka zikar kitni baar aaya hai

Quran Sharif me namaz ka zikar 67 baar (Times) aaya hai

Quran paak mein zakat ka zikr kitni baar aaya hai

क़ुरआन में शब्द “ज़कात” 33 बार इस्तेमाल हुआ है और ज़्यादातर नमाज़ के साथ साथ ज़कात का ज़िक्र हुआ है।

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