Masjid Me Dakhil Hone Aur Bahar Nikalne Ki Dua

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों, अगर आप Masjid Me Dakhil Hone Aur Bahar Nikalne Ki Dua के बारे में जानने के लिए आए हो तो सही जगह आए हो, क्युकी इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा की Masjid me Dakhil hone ki Dua, Masjid se Nikalne ki Dua, और मस्जिद की दुआ क्यों पढ़ते है?

Masjid Me Dakhil Hone Aur Bahar Nikalne Ki Dua

मस्जिद इबादत करने का जगह होगा है या मस्जिद अल्लाह सुभान ता’अला का घर है। और मस्जिद में किसी भी तरह का इबादत करना अल्लाह ता’अला को बहुत ज्यादा पसंद आता है।

इस्लाम में छोटे-छोटे अमल से भी बेशुमार नेकिया मिलती है! क्या पता रोज़ ए महशर कौन सी नेकी काम आ जाये! इसलिए जब भी घर से बाहर जाए तो घर के बाहर जाने वाली दुआ और घर में दाखिल होने की दुआ जरूर पढ़े।

Masjid me Dakhil Hone ki Dua

जब आप नमाज़ पढने या किसी वजह से जब मस्जिद के अंदर जाने लगे तो पहले दाहिना पैर (Right Feet) अंदर रखे और निचे दिया गया दुआ पढ़े।

Masjid me Dakhil Hone ki dua
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ

Masjid me Dakhil Hone ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्मफ़ तहली अब्वाबा रहमतिक

Masjid me Dakhil Hone ki Dua in English
Allahummaf Tahli Abwaba Rahmatik

हिंदी तर्जुमा
ए अल्लाह मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे

Masjid se Nikalne ki Dua

जब आप मस्जिद से बाहर निकलने लगे तो सबसे पहले बयां पैर (Left Feet) बाहर निकाले और ये दुआ पढ़े।

Masjid se Nikalne ki dua
मस्जिद से बाहर निकलने की दुआ

Masjid se Nikalne ki Dua in hindi me
अल्लाहुम्मा इन्नी अस अलुका मिन फजलिक

Masjid se Nikalne ki Dua in English
Allahumma Inni As Aluka Min Fazlik

हिंदी तर्जुमा
ए अल्लाह मैं आप से फज्ल मांगता हूँ

मस्जिद की दुआ क्यों पढ़ते है?

अल्लाह ता’अला ने हमारे लिए बहुत सारे छोटे छोटे अमाल बताए है जिसको पढ़कर सवाब हासिल कर सकते है, जिसमे मस्जिद की दुआ भी सामिल है जिसे आपको पढने में 5 सेकंड भी नहीं लगेगा और सारे सवाब भी मिल जाएगा, इसीलिए हम मस्जिद की दुआ पढ़ते है.

क्या मस्जिद की दुआ नहीं पढ़ने से गुनाह होता है?

अगर सीधा सीधा बात करें तो, नहीं. जी आपने सही सुना मस्जिद से बाहर निकलते वक्त और अंदर दाखिल होते वक्त दुआ न पड़ने से गुनाह तो नहीं मिलता है.

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आज अपने क्या सीखा

आज हमने सीखा की मस्जिद में दाखिल होने और मस्जिद से बाहर निकलते वक़्त की दुआ क्या है, और मस्जिद की दुआ क्यों पढते है, और ये भी जाना की मस्जिद की दुआ पढ़ने से सवाब मिलता है और नहीं पढ़ने से गुनाह भी नहीं होता है.

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